Parivartini Ekadashi 2021-व्रत का महत्व,पूजा विधी और पौराणिक कथा

Parivartini Ekadashi 2021

वर्ष 2021 मे Parivartini Ekadashi व्रत की शुभ तिथी 29 अगस्त दिन शनिवार को है|(परिवर्तिनी एकादशी तिथि)

Parivartini Ekadashi 2021 व्रत का महत्व –

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को को परिवर्तनी एकादशी कहते है।भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के दिन चार मास के लिए निद्रा में जाते है है(चातुर्मास) और इस एकादशी के दिन वो करवट बदलते है।इसलिए भाद्रपद मास की इस एकादशी को परिवर्तनी एकादशी कहा जाता है।करवट बदलते समय भक्त का जाग्रत रहना उसके लिए शुभ फलदायी माना गया है।इस व्रत की कथा को श्रवण करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।यह एकादशी व्रत हमारे पापकर्म के फलों का नाश करता है।(Parivartini Ekadashi 2021)

parivartini Ekadashi व्रत की पूजा विधि –

(Parivartini Ekadashi की पूजन विधी) भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तनी एकादशी व्रत रखा जाता है।

1.परिवर्तनी एकादशी के दिन उपवास करना अनिवार्य है।

2.एकादशी के दिन ब्रम्हमुहूर्त मे उठकर स्नान करके भगवान की सेवा आरंभ करनी चाहिए।

3.भगवान के अर्चविग्रह या प्रतिमा को स्नान करके धूप,पुष्प,चंदन से उनकी पूजा करनी चाहिए।

4.उसके बाद ‘हरे कृष्ण महामंत्र‘ का जाप करना चाहिए।

5.हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करने से मन की अशुद्धी दूर हो जाती है,और पुजापाठ मे हमारा मन लगता है।

6.परिवर्तनी एकादशी के दिन कृष्णभावनाभावित कर्म करने चाहिए।

7.दिनभर भगवान की लीलाओं का श्रवण करना चाहिए।

8. परिवर्तनी एकादशी के दिन आत्मसाक्षात्कारी ब्राम्हणों को भोजन या दान देना चाहिए।

9.एकादशी के दिन भूल से भी अन्न नहीं खाना चाहिए।फलाहार लेकर उपवास करणा चाहिए।Parivartini Ekadashi 2021

Parivartini Ekadashi 2021 व्रत की कथा –

वामन पुरण मे इस व्रत की कथा उल्लेख हुआ है।(परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा) त्रेतायुग मे बलि नाम के राजा थे।बलि राजा एक सद्गुणी राजा थे।महाराज बलि का जन्म दैत्यकुल मे हुआ था।दैत्य कुल मे ही पहले हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष का जन्म हुआ था और प्रल्हाद महाराज भी उसी कुल मे जन्मे थे।बलि राजा ने स्वर्ग पर अपना अधिकार जमा लिया था।(परिवर्तिनी एकादशी की कथा)इस वजह से आदिती पुत्र इंद्र और अन्य देवताओं को बडा कष्ट हो रहा था।फिर इंद्र और देवतागणों ने ब्रम्हा जी के पास जाकर उनसे अपनी समस्या का निवारण करने को कहा,ब्रम्हा जी भगवान विष्णु के पास गए।(परिवर्तिनी एकादशी वामन जयंती) फिर भगवान विष्णु ने वामन रूप मे अवतार धारण किया।भगवान विष्णु बालक रूप मे बलि राजा के पास पहुंचे और उनकी प्रशंसा करने लगे।

(Parivartini Ekadashi 2021)बलि राजा से उन्होंने तीन पग भूमि मांगी।बलि राजा एक दानी व्यक्ति थे।उन्होंने बालक रूप वामन को तीन पग भूमि देने के वचन दिया।अपने शरीर का आकार बढाकर उन्होंने पहले पृथ्वी को नाप लिया,दूसरे पग मे उपर के लोक नाप लिए।अब तिसरा पग रखने के लिए बलि के पास जगह नहीं थी।(परिवर्तिनी एकादशी की कथा) फिर बलि राजा ने तिसरा पग रखने के लिए अपना मस्तक आगे किया।भगवान ने उनके मस्तक पर पैर रखकर उनको पाताल लोक मे भेज दिया।बलि राजा ने इसपर भी प्रसन्नता व्यक्त की।इसलिए भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया की मे सदैव तुम्हारे निकट वास करूँगा।इस वजह से भाद्रपद शुक्ल पक्ष के दिन की एकादशी को करवट बनलने के बाद भगवान की मूर्ति बलि का आश्रय लेती है और दूसरी क्षीरसागर मे शेषनाग के पीठ पर होती है।(परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा इन हिंदी)

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