Dussehra in Hindi 2021-विजयादशमी दशहरा का महत्व और कथा

Dussehra in hindi-हमारी सनातन संस्कृती में अनेक त्योहार और पर्व बताए गए है। सनातन संस्कृती मे बताए गए हर एक त्योहार के पीछे अध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण होते है। हमारी संस्कृती हमे बहुत कुछ देती है। पूर्ण वर्ष में एक के बाद एक आने वाले यह त्योहार और पर्व हमें आनंद और सुख दे जाते है। आज हम ऐसे ही आनंद और सुख से भरे विजयादशमी दशहरा त्योहार की बात करेंगे। आज हम जानेंगे दशहरा का महत्व और कथा।(DUSSEHRA 2021)

Dussehra in hindi

दशहरा का महत्व (importance of dussehra) –

अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दशमी को दशहरा मनाया जाता है| दशहरे के इस पर्व को विजयादशमी भी कहा जाता है। दशहरा अच्छाई की बुराई पर हुई जीत का प्रतीक है। विजयादशमी का यह पर्व शक्ति और मर्यादा का पर्व है। इसके पहले आने वाला नवरात्री का पर्व भी एक शक्ति का पर्व है। न्याय की अन्याय पर,सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर हुई विजय का यह एक पावन पर्व है। हमारे अंदर के किसी भी आंतरिक बुराई को सदा के लिए मिटाना,यह भी हमारी एक आंतरिक विजय है।

dussehra का यह पर्व ॠतुचक्र से भी संबंधित है। प्राचीन काल मे बहुत वर्षा होती थी तब लोग यात्रा करना बंद कर देते थे। पर दशहरे के त्योहार तक वर्षा समाप्त हो जाती थी। तब लोग दशहरे से यात्राए करना प्रारंभ कर देते थे। vijayadashami के इस पावन दिन पर हमे शस्त्र अस्त्र और शमी के वृक्ष का पुजन करना चाहिए। (Dussehra in hindi)

भगवान श्रीरामचंद्र –

(dussehra significance) यही वो दशहरा का दिन है जिस दिन भगवान श्रीराम ने लंका पर चढाई करके विजय प्राप्त की थी। श्रीमद्देवीभागवत और अन्य पुराण ग्रंथो के अनुसार लंका पर चढाई करने से पूर्व भगवान राम ने नवरात्री का अनुष्ठान किया था। उस समय रावण ने भी नवरात्री का भी का व्रत करके शक्ति की उपासना कि थी। सभी याज्ञिक अनुष्ठान करने के बाद भगवान राम और रावण ने शक्ति की उपासना कि थी। इसके बाद भगवान राम और रावण दोनों कों शक्ति ने साक्षात दर्शन दिए थे। भगवान राम को शक्ति ने विजयी भव: का आशीर्वाद दिया था तथा रावण को ‘तुम्हारा कल्याण हो’ ऐसा आशीर्वाद दिया था। भगवान राम के हाथों मृत्यू प्राप्त करने मे ही रावण का कल्याण था इसलिए उसको यह आशीर्वाद मिला था। (DUSSEHRA 2021)

Dussehra के इसी दिन ही भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त की थी और भगवान राम की सवारी बडी सजधज के साथ निकली थी। विजयादशमी का यह वही शुभ दिन है जिस दिन भगवान राम ने रावण को मृत्युदंड देकर लंका पर धर्म की स्थापना की थी। हम सबके लिए यह दिन एक विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन भगवान राम रावण को मारकर पुन माता सीता से मिले थे। दशहरा के दिन क्षत्रिय वर्ण के लोग शस्त्रों का पुजन करते है तो ब्राम्हण शास्त्रों का पुजन करते है। दशहरा के दिन लोग शमी के वृक्ष को पूजते है।(Dussehra in hindi)

विजय काल का महत्व (Dussehra in Hindi)-

१.अश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक काल होता है।(Dussehra in Hindi)

२.विजय काल सभी कार्यों को सिद्ध करने वाला काल होता है। इसलिये इस शुभ दिन को “vijayadashami” भी कहते है|

३.विजय नामक यह काल बहुत ही शुभ होता है इसीलिए मान्यता है की दशहरा के दिन शुरू किए हुए किसी भी कार्य मे हमे सफलता मिलती है।(Dussehra in Hindi)

४.मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने इसी विजयकाल में लंका पर चढाई कि थी। इसलिए यह दिन बहुत पवित्र माना गया है। (Dussehra in Hindi)

५.विजय काल में प्रारंभ किया कोई भी अच्छा कार्य हमारा कल्याण कर देता है। विजय काल में प्रारंभ किए हुए अच्छे कार्य में हमे सफलता मिलती है।(Dussehra 2021)

नीलकंठ पक्षी का महत्व (Dussehra in Hindi)-

विजयादशमी के शुभ पर्व पर नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना चाहिए,इस पक्षी की मान्यता भगवान शिव स्वरूप के समान है। Dussehra के दिन इस पक्षी का दर्शन करने से सुख,समृद्धी,ऐश्वर्य,धन की प्राप्ती होती है। साथ ही साथ हर क्षेत्र में प्रगती के मार्ग प्रशस्त हो जाते है। भगवान श्रीराम के लंका प्रस्थान के समय नीलकंठ पक्षी ने दर्शन देकर विजय का सगुन दर्शाया था। तभीसे विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन की परंपरा है।(Dussehra in hindi)(neelkanth bird)

शमी वृक्ष का महत्व (Dussehra in Hindi)-

रामायण और महाभारत में इस पवित्र शमी के वृक्ष का वर्णन मिलता है। शमी का वृक्ष दृढता और तेजस्विता का प्रतीक है। शमी के वृक्ष में दूसरे वृक्षों की अपेक्षा अग्नि अधिक मात्रा में विद्यमान रहती है। यज्ञ में शमी के वृक्ष की लकडी का बहुत महत्व है। अनेक धार्मिक कथाओंमे शमी के वृक्षको खेजडी,जाडी,बन्नी आदि नामों से भी जाना जाता है। धर्म की स्थापना करने के लिए इसी शमी के वृक्ष ने त्रेतायुग में भगवान राम को और द्वापारयुग में अर्जुन को किस प्रकार सहाय्य किया यह हम आगे कथा मे देखेंगे।(vijayadashami 2021)

दशहरा की कथा –

एक बार माता पार्वती ने शिवजी से पुछा कि ‘लोगों मे जो दशहरे का त्योहार प्रचलित है,उसका क्या फल है?’
शिवजी ने बताया कि अश्विन शुक्ल दशमी को सायंकाल में तारा उदय होने के समय विजय नामक काल होता है जो मनुष्य की समस्त इच्छाओं को पूर्ण करता है। शत्रु पर विजय प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले राजा को इसी समय प्रस्थान करना चाहिए।अश्विन शुक्ल दशमी के दिन अगर श्रवण नक्षत्र का योग होता है तो यह दिन और भी शुभ माना जाता है।

भगवान श्रीराम ने इसी विजयकाल में लंका पर चढाई की थी। इसलिए यह दिन बहुत पवित्र माना गया है। क्षत्रिय लोग इसे अपना प्रमुख त्योहार मानते है। vijayadashami के इस पावन त्योहार में शमी के वृक्ष का पुजन करना चाहिए।पुजन करते वक्त ऐसी प्रार्थना करनी चाहिए की “हे शमी! तू सब पापों को नष्ट करने वाला है और अधर्मी शत्रुओं को भी पराजय देने वाला है।हे शमी तूने ही अर्जुन के धनुष को धारण किया था और तूने ही भगवान राम से प्रियवाणी कही थी।(Dussehra in hindi)

फिर माता पार्वती शिवजी से बोली “शमी वृक्ष ने अर्जुन का धनुष कब और किस कारण धारण किया था तथा भगवान राम से कैसी प्रियवाणी कही थी,सो कृपा कर समझाइये। (Dussehra festival in hindi)

शिवजी ने उत्तर दिया ” दुर्योधन ने जुए के खेल में छल से पांडवों को परास्त किया था। तब दुर्योधन ने पांडवों को बारह वर्षों तक प्रकट वनवास तथा एक वर्ष तक अज्ञातवास दिया था। उस समय दुर्योधन ने पांडवो से यह शर्त रखी की,अगर अज्ञातवास के दौरान पांडवों को कोई पहचान लेगा तो उन्हें फिर से बारह वर्षों तक वनवास लेना पडेगा। उस अज्ञातवास के समय अर्जुन ने अपना धनुष बाण एक शमी वृक्ष पर रखा था और वो वृहन्नला के वेष में राजा विराट के यहां रह रहे थे। इसप्रकार से शमी वृक्ष ने अर्जुन के धनुष बाण की रक्षा कि थी। (vijayadashami 2021)

भगवान राम जब लंका पर चढाई करने के लिए प्रस्थान कर रहे थे तब शमी के वृक्ष ने कहा था की “आपकी विजय होगी। इसलिए विजय काल में शमी के वृक्ष को भी पुजा जाता है।(Dussehra in hindi) dashahara date

एकबार भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा था कि,vijayadashami के दिन राजा को स्वयं अलंकृत होकर अपने दास और हाथी,घोडों का श्रृंगार करना चाहिए। राजा को अपने पुरोहित के साथ पूर्व दिशा में प्रस्थान करके अपने राज्य कि सीमा से बाहर जाना चाहिए। राज्य की सीमा के बाहर जाकर वास्तु पुजा करके अष्ट दिग्पालों सहित पार्थ देवता की वैदिक मंत्रो का उच्चारण करके पुजा करनी चाहिए।

शत्रु की मुर्ति बनाकर उसके छाती पर बाण से निशाना लगाना चाहिए। इस समय पुरोहित को वैदिक मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। विजयादशमी के इस शुभ अवसर पर राजा को ब्राम्हणों की पुजा करनी चाहिए। राजा को अस्त्र,शस्त्र और हाथी घोडों का निरीक्षण करना चाहिए। इन सभी क्रियाओं को समाप्त करके के बाद पुन: अपने राज्य में लौटना चाहिए। दशहरे के दिन जो राजा इसप्रकार से विधिवत दशहरा मनाता है वह सदा अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करता है।(Dussehra in hindi)

दशहरा कब है ?

वर्ष 2021 में दशहरा का पर्व 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है।

why do we celebrate dussehra in hindi ?

अश्विन शुक्ल पक्ष के दशमी का यही वो दिन है जिस दिन भगवान राम ने लंका पर चढाई की थी| इसी दिन भगवान राम ने रावण को मारकर लंका पर धर्म स्थापना की थी,इसी कारण से हम dussehra मनाते है|

why is dussehra celebrated in hindi ?

न्याय की अन्याय पर,सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर हुई विजय का यह एक पावन पर्व है। धर्म की अधर्म पर हुई इस जीत को दर्शाने के लिये हम dussehra मनाते है|

how do we celebrate dussehra in hindi ?

दशहरे के दिन हमें शमी के वृक्ष का पुजन करना चाहिए,इस दिन ब्राम्हणों को शास्त्र की एवं क्षत्रियों को शस्त्र की पुजा करनी चाहिए। इस दिन हमें कुछ नया शुरू करना चाहिए।

दशहरा क्यों मनाया जाता है ?

दशहरा के दिन भगवान राम ने रावण को युद्ध में पराजित करके उसको मृत्युदंड दिया था। सत्य की असत्य पर,न्याय की अन्याय पर और धर्म की अधर्म पर हुई इस जीत को मनाने के लिए दशहरा मनाया जाता है।

दशहरा कब मनाया जाता है ?

नवरात्री के पर्व के अंत मे अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा मनाया जाता है।

दशहरा में रावण को क्यों जलाया जाता है ?

दशहरा का यही वो दिन है जिस दिन भगवान श्रीराम ने रावण को मृत्युदंड दिया था। कभीबी अधर्म की धर्म पर जीत नही हो सकती यह दिखाने के लिए प्रतिवर्ष प्रतिकात्मक रूप से रावण को जलाया जाता है।

भारत में दशहरा कैसे मनाया जाता है ?

भारत के उत्तरी क्षेत्र में मेघनाथ,रावण और कुंभकर्ण के बड़े बड़े पुतलों को जलाकर एवं रामलीला के नाटक का आयोजन करके दशहरा मनाया जाता है।

शस्त्र पूजन क्यों किया जाता है ?

शस्त्र पूजन इसलिए किया जाता है क्योंकि अर्जुन ने एक वर्ष तक अपना धनुष शमी के वृक्ष पर रख दिया था। दशहरे के दिन ही उसे निकाला था इसलिए शस्त्र पूजन किया जाता है।

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This Post Has 3 Comments

  1. Srajal sharma

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