विजया एकादशी 2022-विजया एकादशी व्रत कथा,महत्व और पूजा विधी

विजया एकादशी 2022 कब है? वर्ष 2022 मे विजया एकादशी व्रत की शुभ तिथी फरवरी दिन रविवार को है|

विजया एकादशी 2022

विजया एकादशी का महत्व –

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। त्रेतायुग मे भगवान श्रीराम विजया एकादशी के दिन ही समुद्र तट पहुंचे थे। विजया एकादशी व्रत का दृढता से पालन करने से मनुष्य समस्त कष्ट से मुक्त हो जाता है। जो व्यक्ति इस एकादशी का पालन करता है उसकी सदा विजय होती रहती है।अगर हमे किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त करनी है तो हमे इस एकादशी व्रत का पालन करना चाहिए। विजया एकादशी व्रत का पालन करने वाले व्रती को सफलता की प्राप्ती होती है। इसलिए इस एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। (vijaya ekadashi importance)

विजया एकादशी का पालन करने से व्रती को सद्गती प्राप्त होती है। इस व्रत के पुण्यफल से व्यक्ति को सभी कार्यो मे सफलता मिलती है। इस व्रत की कथा को पढने से मनुष्य को वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। (vijaya ekadashi benefits)(विजया एकादशी 2022)

विजया एकादशी 2022 पूजा विधी –

इस एकादशी व्रत की पूजन विधी(विजया एकादशी 2022) –

१.दशमी के दिन स्वर्ण,चांदी,तांबा या मिट्टी का घड़ा बनाये।

२.उस घड़े को जल से भरकर तथा उसके उपर पांच पल्लव रखकर उसे वेदिका पर स्थापित करें।

3.उस घडे के नीचे सतनाज और उपर जोह रखें।

4.फिर श्री नारायण भगवान की मूर्ति स्थापित करें।

5.विजया एकादशी 2022 के दिन ब्रम्ह मुहूर्त मे उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर धूप,दीप,पुष्प नैवेद्य आदि से भगवान की पूजा करें।

6.तत्पश्चात घडे के सामने बैठकर भगवान के नामों(हरे कृष्ण महामंत्र) का जप करते हुए दिन व्यतीत करें।

7.रात्रि को भी इसी प्रकार भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें। उसके पश्चात द्वादशी के दिन नदी या तालाब किनारे उस कलश की विधिवत पूजा करके वह कलश किसी योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

८.एकादशी के दिन फलाहार करके उपवास करे।

विजया एकादशी व्रत कथा –

त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी को जब 14 वर्ष का वनवास हुआ तब लक्ष्मण तथा माता सीता सहित वो पंचवटी में निवास करने लगे। पंचवटी में दुष्ट रावण ने सीता माता का हरण किया तब इस समाचार से श्री रामचंद्र और लक्ष्मण अत्यंत व्याकुल हुए सीता जी की खोज में चल दिए। घूमते घूमते श्रीराम और लक्ष्मण जटायु से मिले और जटायु ने उन्हें माता सीता का वृत्तांत सुनाया और आगे जाकर उनकी सुग्रीव से मित्रता हुई और प्रभु श्री राम ने बाली का वध किया। हनुमान जी ने लंका में सीता जी का पता लगाया और वहां से लौटकर हनुमान जी ने भगवान राम के पास आकर सब समाचार उन्हें सुनाया। वह समाचार सुनकर भगवान श्री राम ने सुग्रीव के साथ लंका जाना सुनिश्चित किया।(विजया एकादशी की कथा)

श्रीराम ने लक्ष्मण जी से कहा की ‘हे सुमित्रानंदन इस अघात सागर में अनेक भयानक जीव जंतु है| इसे सुगमता से कैसे पार करें’। तब लक्ष्मण जी ने कहा की ‘इस द्वीप में प्राचीन काल से बक्तालभ्य मुनी रहते है। पास ही उनका एक आश्रम है हे रघुनंदन उन्हें इस समस्या का समाधान पूछना चाहिए’। फिर लक्ष्मण जी और प्रभु रामचंद्र जी बक्तालभ्य मुनि के आश्रम गए और उन्हें सादर प्रणाम किया, मुनिवर ने उन्हें देखते ही पहचान लिया कि यही परम पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम हैं।(विजया एकादशी 2022)

अत्यंत आनंदित होकर उन्होंने पूछा कि प्रभु किस कारण आपका आना हुआ है। भगवान श्रीराम जी ने कहा की है मुनि रावण का संहार करने के लिए मैं यहां आया हूं, कृपया इस सागर को पार करने का उपाय बताइए। मुनीवर ने कहा हे राम फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का उत्तम व्रत करने से निश्चय ही आपकी विजय होगी साथ ही साथ आप समुद्र को भी अवश्य पार कर लेंगे। vijaya ekadashi vrat katha in hindi

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