ब्रह्म मुहूर्त का समय | जनिए TOP 9 ब्रम्ह मुहूर्त के फायदे | Brahma Muhurta Time

brahma muhurta time / ब्रह्म मुहूर्त का समय

ब्रह्म मुहूर्त की महिमा –

ब्रह्म मुहूर्त का समय सूर्योदय के २ मुहूर्त पहले होता है| एक मुहूर्त की अवधी 48 मिनट होती है| यानिकी सूर्योदय के 96 मिनट पूर्व का समय ब्रम्ह मुहूर्त का सही समय होता है| ब्रम्हमुहूर्त की अवधी 48 मिनट की होती है(brahma muhurta time)। शास्त्रों मे ब्रम्हमुहूर्त को बहुत शुभ समय माना गया है। शास्त्रों के अनुसार नींद से जागने के लिए ब्रम्हमुहूर्त का यह समय सबसे उत्तम है। प्राचीन समय मे लोग इसी मुहूर्त मे उठा करते थे। उस समय के ऋषी मुनिं ब्रम्हमुहूर्त मे उठकर ध्यान और योग की क्रियाए किया करते थे।

ब्रम्हमुहूर्त का समय अध्यात्मिक,शारिरिक और मानसिक सब तरह से फायदेमंद होता है। यह वह समय है जब देवता धरती लोक पर विचरण करते है। इस समय वायु एकदम स्वच्छ और लाभदायक होती है। यह वह शुभ समय है जब मंदिरो के पट खोल दिए जाते है और पुजापाठ आरंभ किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार साधारण 4:15 बजे से 5:15 बजे तक का समय ब्रम्हमुहूर्त का समय होता है।

ब्रम्ह मुहूर्त का समय बहुत महत्वपूर्ण समय है। इस समय उठणे से सौंदर्य,बल,विद्या,बुद्धि और स्वास्थ की प्राप्ती होती है। शास्त्रो मे ऐसा बताया गया है की ब्रम्ह मुहूर्त की निद्रा पुण्य का नाश करती है। इसलिये हमे इस समय उठना चाहिए। वैज्ञानिको ने भी यह सिद्ध किया है की ब्रम्ह मुहूर्त के समय पृथ्वी का वातावरण शुद्ध होता है। इस समय वातावरण मे प्राणवायू की मात्रा अधिक होती। शुद्ध वायू की वजह से मन और मस्तिष्क शुद्ध रहता है।(Brahma Muhurta Time)

“ब्रम्ह मुहूर्त” इस शब्द का अर्थ –

यहापर ब्रम्ह इस शब्द का अर्थ भगवान है और मुहूर्त शब्द का अर्थ समय।

इसप्रकार से ब्रम्हमुहूर्त इस शब्द का अर्थ होता है भगवान का समय। वैदिक शब्दकोशों में ब्रम्ह इस शब्द को सर्वश्रेष्ठ,सर्वोत्तम,सर्वोच्च भी कहा गया है। इसलिए ब्रम्ह मुहूर्त के इस समय को हम सभी मुहूर्तों मे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त भी कह सकते है।(ब्रह्म मुहूर्त का समय)

शास्त्रों मे ब्रम्ह मुहूर्त के समय का वर्णन –

ब्रम्हमुहूर्त के चमत्कारी फायदे के बारे मे सिर्फ शास्त्र नहीं बल्कि विज्ञान और आयुर्वेद मे भी विस्तार से बताया गया है।इस मुहूर्त का धार्मिक महत्व ऐसा है की वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अनुसार रावण की लंका मे स्थित अशोक वाटिका मे हनुमान जी ब्रम्हमुहूर्त मे ही पहुंचे थे।तब हनुमान जी की माता सीता के मंत्रोच्चार की आवाज सुनकर उनसे भेंट हुई थी।(ब्रह्म मुहूर्त का समय)

ऋग्वेद मे लिखा हुआ है की,

प्रातारन्तं प्रातरिष्वा दधाति तं चिकित्वा प्रतिगृह्यनिधत्तो।
तेज प्रजां वर्धयुमान आय यस्पोषेण सचेत सुधीर।।


इसका अर्थ है की सूर्य उदय होने से पहले उठने से मनुष्य स्वस्थ रहता है,और कोई भी बुद्धिमान मनुष्य इस समय पर सोकर उसे व्यर्थ नही गवाएगा।

शास्त्रों मे भी कहा गया है की,

वर्णं कीर्तीं मतिं लक्ष्मी स्वास्थ्यमायुच्श्र विदन्ति।
ब्राम्हे मुहूर्ते संजाग्रच्छि वा पंकज यथा।।


इसका अर्थ है की ब्रम्हमुहूर्त के समय जागने से व्यक्ति को रूप,धन,दौलत अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ती होती है।इस समय उठने से शरीर कमल की तरह सुंदर हो जाता है।

सामवेद मे कहा गया है,

ब्रह्म मुहूर्त का समय

यद्य सूर उदितोनागा मित्रोर्यमा।
सुवाती सविता भग:।।


अर्थात व्यक्ति को सूर्योदय के पहले ही भगवान की भक्ति करनी चाहिए।इस समय की अमृततुल्य हवा से स्वास्थ्य और लक्ष्मी दोनों मे वृद्धि होती है।

ब्रम्ह मुहूर्त का अध्यात्मिक महत्व –

ब्रम्हमुहूर्त का समय भगवान की भक्ति,ध्यान,प्रार्थना और पुजापाठ के लिए सबसे अनुकुल समय है। इस समय का उपयोग हमे अच्छे कर्म करने के लिए करना चाहिए। ब्रम्हमुहूर्त के समय हमे शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए। ब्रम्हमुहूर्त के समय किया हुआ शास्त्रों का अध्ययन हमारे लिए बहुत उपयोगी होता है। शास्त्रों के गहन सिद्धांत हमे शीघ्र ही अवगत हो जाते है। इस समय पढी हुई बाते हमारे बुद्धि मे बैठ जाती है।इसलिए अगर हमे हमारी स्मरण शक्ति बढानी है तो ब्रम्हमुहूर्त में उठकर शास्त्रो का अध्ययन करना होगा।सनातन धर्म के ग्रंथो मे ब्रम्हमुहूर्त का महत्व बहुत बार बताया गया है।(Brahma Muhurta Time)

हमारे धर्म ग्रंथ आयुर्वेद जो कि बहुत ही माने जाने वाला धर्म ग्रंथ है। इसमें यह बताते हुए लिखा है कि जो लोग बीमारी मुक्त जीवन एवं लंबी आयु चाहते हैं उन्हें ब्रह्म मुहूर्त के समय उठना चाहिए । ब्रह्म मुहूर्त के समय में किया गया कोई भी कार्य या जानी गई कोई भी कला या कोई चीज इस तरह विकसित होती है जिस तरह जमीन में बीज खाद पानी एवं सूर्य की किरणों के साथ विकसित होता है। आप लोगों ने अवचेतन मन एवं चेतन मन के बारे में तो सुना ही होगा हमारा चेतन मन बहुत तेज होता है परंतु आपने यह जरूर कहीं लोगों को कहते हुए सुना होगा कि अवचेतन मन की शक्ति बहुत ऊंची है एवं यदि हम अवचेतन मन की शक्ति का पूर्ण लाभ उठा पाए तो हम बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएंगे। हमारे अवचेतन मन को विश्व शक्ति विकसित करती है। यह विश्व शक्ति वही शक्ति है जो कि इस ब्रह्मांड का संचार करती है, इस विश्व शक्ति का संचार सबसे अधिक ब्रह्म मुहूर्त में ही होता है।(ब्रह्म मुहूर्त की महिमा)

ब्रम्ह मुहूर्त का वैज्ञानिक महत्व –

अब बात करते है इसके वैज्ञानिक महत्व की। विज्ञान ने भी यह सिद्ध किया है की ब्रम्हमुहूर्त के समय हवा बहुत शुद्ध होती है और इस समय ऑक्सिजन की मात्रा भी अधिक होती है। इस समय जागने से मन और तन दोनों भी शुद्ध रहते है। मनुष्य को लंबी आयु की प्राप्ति होती है। ब्रम्हमुहूर्त के और भी कई फायदे है खून मे पीएच की वैल्यू संतुलित रहती है,दर्द खिंचाव और शरीर के दुखने से राहत मिलती है,शरीर मे Minerals और Vitamins के उपयोग और भी बेहतर होते है। आयुर्वेद मे भी ब्रम्हमुहूर्त मे उठने के इन सब फायदों को सहमती मिली है। (ब्रह्म मुहूर्त का समय)

प्रकृती के साथ स्वयं का विकास –

brahma muhurta के समय ब्रम्हांड मे एक अनोखी शक्ति का उदय होता है। मनुष्य अगर प्रकृति के आधार पर अपना जीवनयापन करे तो प्रकृति उसे बहुत कुछ देती है,यह प्रकृति का नियम है। इसलिए हमे भी प्रकृति के अनुसार ही अपना जीवनयापन करना चाहिए। ब्रम्ह मुहूर्त का समय हमारे जीवन मे बहुत बडा बदलाव लाने की क्षमता रखता है| इसलिये हम सबको ब्रम्ह मुहूर्त मे उठना चाहिए|(ब्रह्म मुहूर्त का समय)

ब्रम्हमुहूर्त के समय उठना हमारे जीवन में एक बहुत बडा बदलाव लाता है। जितने भी सफल व्यक्ति है,वह सब सुबह उठकर कार्य करने की सलाह देते है। आधुनिक युग में हम देखते है कि कुछ लोग टेक्नालॉजीकल चीजों की वजह से सुबह नहीं उठ पाते क्योंकि वे रात को देर से सोते है। हमे ब्रम्हमुहूर्त मे उठने के लिए रात को जल्दी सोना चाहिए। ब्रम्हमुहूर्त मे उठकर नित्यकर्म संपन्न करके हमे भगवान की पुजा करनी चाहिए उनके नामों का जाप करना चाहिए जिससे हमारी बुद्धि सात्त्विक बनती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि सात्त्विक होती है,वो व्यक्ति कठीन समय मे भी योग्य निर्णय लेने की क्षमता रखता है। इसलिए अगर हमे एक सफल व्यक्ति बनना है तो हमे ब्रम्हमुहूर्त के समय उठना चाहिए।(brahma muhurta time)(ब्रह्म मुहूर्त का समय)

ब्रह्म मुहूर्त का समय और सफलता का रहस्य –

जब तक सुरज हमे जगाएगा तब तक हम कुछ नहीं कर सकते सफलता तो तबसे प्रारंभ होती है जबसे हम उठकर सुरज को जगाते है। यानिकि हमे सुरज उगने से पहले उठना चाहिए। brahma muhurta मे उठने से हमारे बुद्धि में जो विचार उत्पन्न होते है वो बहुत खास होते है। ऐसे विचार हमारे जीवन बदलाव लाते है। सुबह उठने से हमारी बुद्धि सकारात्मक होती है। ऐसी सकारात्मकता हमे दिनभर सकारात्मक विचारों की ओर प्रभावित करती है। देर से उठने से हमारी बुद्धि में नकारात्मकता आती है। देर से उठने से हमारे बुद्धि मे जो नकारात्मकता आती है वो हमे दिनभर नकारात्मक विचारों की और प्रभावित करती है।(ब्रह्म मुहूर्त का समय)

brahma muhurta के समय उठने वालें लोग पुरे दिन कार्यशील रहते है और देर से उठने वाले लोग सदा आलस्य मे रहते है। जो लोग ब्रम्हमुहूर्त में उठते है वो सदा खुश रहते है। ऐसे लोगों को तनाव,चिंता जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पडता।जबकी देर से उठने वाले लोग तनाव में होते है। तनाव की वजह से ऐसे लोग छोटी छोटी चीजों पर क्रोधित होते रहते है।(brahma muhurta time)

ब्रम्हमुहूर्त के समय उठने से हमारा शारिरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है। जब हमरा शारिरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है तब हम हम किसी भी प्रकार का शारिरिक कष्ट सहन करने की क्षमता रखते है। जब हमारा मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहता है तब हम किसी भी प्रकार के मानसिक कष्ट को सहन कर सकते है।(BRAMHA MUHURTA IN HINDI)

ब्रम्ह मुहूर्त के समय उठने के फायदे(BRAMHA MUHURTA BENEFITS) –

१.ब्रह्म मुहूर्त के समय उठने से हमारा पाचन तंत्र अच्छा रहता है।

2.ब्रम्हमुहूर्त के समय उठने से हमारी बुद्धि सदा कार्यशील रहती है।

3.कार्यशील बुद्धि से हम सही निर्णय ले सकते है।

4.ब्रह्म मुहूर्त के समय उठने से हमारी शारिरिक एवं मानसिक स्थिती संतुलित रहती है।

5.ब्रम्हमुहुर्त मे उठने से बुद्धि मे सात्त्विक विचार उत्पन्न होते है।

6.ब्रम्हमुहूर्त मे उठने से हमारी निर्णय लेने की क्षमता बढ जाती है। जिससे हम हमारे वर्तमान जीवन मे स्वयं के लिए अच्छे निर्णय ले सकते है।

7.ब्रम्हमुहूर्त में उठने से हमें एक अलग तरह की ताजगी का अनुभव होता है,ऐसी ताजगी हमे कार्यशील बनाए रखती है।

8.ब्रह्म मुहूर्त के समय उठने से हमारे मन मे शांति रहती है,तनाव आदि बुरे विचारों का सन निम्न हो जाता है।

9.ध्यान और योग करने के लिए ब्रम्ह मुहूर्त का समय अनुकूल है।

समय के आधार पर गुणो के प्रभाव –

सनातन धर्म के शास्त्रों मे अलग अलग मुहूर्त के आधार पर सत्वगुणी,रजोगुणी और तमोगुणी समय बताए गए है। ब्रम्हमुहूर्त के समय से 10 बजे तक सत्वगुणी समय होता है। 10 से 6 बजे तक रजोगुणी समय होता है और शाम का समय तमोगुणी समय होता है। सत्वगुणी समय मे सत्वगुण का प्रभाव रहता है। रजोगुणी समय मे रजोगुण का और तमोगुणी समय मे तमोगुण का प्रभाव रहता है।(ब्रह्म मुहूर्त का समय)

सत्वगुण को प्रकाश और ज्ञान कहा गया है,इसलिए ब्रम्हमुहूर्त से 10 बजे तक का समय ज्ञान ग्रहण करने के लिए उत्तम समय होता है और इस समय अध्यात्मिक क्रियाए की जाती है। यह समय सात्विकता से भरा हुआ होता है,इसलिये इस समय मे हम प्रसन्नता का अनुभव करते है।रजोगुण को लोभ कहा गया है,इसलिए 10 बजे के बाद लोग अपनी उपजिविका के लिए पैसों के पीछे भागना चालू करते है। इस समय भौतिक जगत बहुत कार्यशील रहता है। तमोगुण को अज्ञान और मोह कहा गया है,इसलिए इस समय ज्यादातर लोग जुआ खेलना,मद्यपान करना,अवैध संग करना जैसे कार्य करते रहते है। ब्रह्म मुहूर्त का समय हमारे जीवन मे बहुत उपयोगी समय है।इस शुभ समय के उपयोग हमे हमारे जीवन मे अवश्य करणा चाहिए।(Brahma Muhurta Time)

यदि आप सनातन धर्म की परंपराए,व्रत,कथा और त्योहारों के बारे में जानने की इच्छा रखते है तो हमारी वेबसाइट के NOTIFICATIONS चालू करें।(ब्रह्म मुहूर्त की महिमा)

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