निर्णय कैसे लेना चाहिए – निर्णय लेने की प्रक्रिया

आज हम जानेंगे की हमे निर्णय कैसे लेना चाहिए हमारे जीवन मे हम हररोज कई निर्णय लेते है।कभी हम भविष्य के बारे मे निर्णय लेते है तो कभी वर्तमान मे चल रहे जीवन के लिए।हम जो भी बडे या छोटे निर्णय लेते है,वो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है।हमारे जीवन मे लिए गए छोटे-छोटे निर्णय भी मायने रखते है तो हमारे जीवन मे लिए गए बडे निर्णय भी बहुत मायने रखते है।हमारी निर्णय लेने की क्षमता और निर्णय लेणे की प्रक्रिया अच्छी होगी तो हम सहजता से एक सफल व्यक्ति बन सकते है।

निर्णय कैसे लेना चाहिए

(निर्णय कैसे लेना चाहिए)सही निर्णय लेने के लिए उपयुक्त पहलू –

1.निर्णय लेते वक्त समय को ध्यान मे रखना।
2.निर्णय लेने मे बुद्धि का महत्व।
3.मन पर संयम प्राप्त करके सही निर्णय लेना।
4.भावनाओं मे फंसकर निर्णय नहीं लेना।
5.निर्णय को सही साबित करने के लिए प्रयास जरूर करना,पर अतिप्रयास मत करना।
6.भगवान पर विश्वास करना।
7.सही निर्णय के लिए स्वयं पर विश्वास करना ।

आइए जानते है विस्तार मे|

1.निर्णय लेते वक्त समय को ध्यान मे रखना।

हमने आज लिया हुआ निर्णय हमारे भविष्य को बनाता है,अगर हम आज गलत निर्णय लेते है तो उससे हमारे भविष्य पर बुरा असर पडता है।हमने वर्तमान मे लिए हुए अच्छे निर्णय हमारे भविष्य को उज्जवल बनाते है।वर्तमान मे अगर हम समय का ध्यान रखते हुए अच्छे निर्णय लेते है,तो हमारा भविष्य भी अच्छा होगा।पर वर्तमान मे हम समय का ध्यान न रखते हुए निर्णय लेंगे तो उसके बुरे परिणाम हमारे भविष्य मे दिखाई देंगे।इसलिए हमे सही निर्णय लेने की कला को सिखना चाहिए।हमारी निर्णय लेणे की प्रक्रिया मे समय बहुत महत्व रखता है|देर से लिए हुए सही निर्णय का भी कोई महत्व नही है,क्योंकी समय के साथ परीस्थितीया भी बदलती रेहती है.

2.निर्णय लेने की प्रक्रिया मे बुद्धि का महत्व-

हमें अपने जीवन में लिए जाने वाले निर्णयों के बारे में यथार्थ दृष्टी से सोचना होगा और वो काम हमारी बुद्धि के द्वारा किया जाता है।आज हम जो निर्णय लेंगे उसपर हमारा भविष्य निर्भर करता है।

सही निर्णय लेने की हमारी क्षमता का आधार होती है हमारी बुद्धि।बुद्धि वास्तविक रूप से विश्लेषण करने की क्षमता है, यदि आपकी बुद्धि में ज्ञान वास करता है,तो आपके द्वारा किया गया हर निर्णय सही होता है,लेकिन यदि आपकी बुद्धि रजोगुणी या तमोगुणी है,तो आपने लिए हुए निर्णय गलत साबित होंगे।

आपका वर्तमान जीवन और भविष्य जीवन आपके द्वारा लिए गए निर्णय पर निर्भर करता है, इसलिए आपको अच्छे निर्णय लेने होंगे।

3.मन पर संयम प्राप्त करके सही निर्णय लेना-

हमारा मन बहुत हि चंचल है,निर्णय लेते वक्त हमारा मन सदा असंतुलित रहता है।हमारा मन इतना चंचल है की अगर हम सही निर्णय ले रहे है,तो भी वो हमे गलत निर्णयों पर ले जाने का प्रयास करता है।हमारे मन मे सदा अनेकों विचार आते है,और ऐसे विचार हमे एक चीज से दूसरी चीज पर भटकाते रहते है।
मन को बुद्धि के माध्यम से संतुलित करना यही एक उपाय है,जो हमारे मन को संतुलित कर सकता है।
बुद्धि को शक्तिशाली बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है,जैसे जैसे हम बुद्धि मे ज्ञान को ग्रहण करते है,वैसे ही हमारी बुद्धि शक्तिशाली बनती जाती है।अगर हमारी बुद्धि हमारे मन से शक्तिशाली है,तो वो हमारे मन को सहजता से संतुलित कर देगी।

4.(निर्णय कैसे लेना चाहिए)भावनाओं मे फंसकर निर्णय नहीं लेना चाहिए-

कोई भी निर्णय लेते समय, आपका दिमाग संतुलित होना चाहिए,यदि आप क्रोध मे है और ऐसी स्थिति मे अगर आप निर्णय लेते हैं,तो यह निश्चित रूप से आपको किसी न किसी दुविधा मे फसाएगा,और यदी आप बहुत आनंदित होकर भी निर्णय लेते है तो वो भी आपको किसी ना किसी दुविधा मे फसाएगा।

हमे कभीबी भावनाओं मे फंसकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।जब हम सुख-दुख जैसे द्वंद्वों मे फंसकर निर्णय लेते है तब वो निर्णय अक्सर गलत साबित होते है,क्योंकि उस वक्त हम किसी विषय के बारे मे विचार करने मे असमर्थ होते है।
निर्णय लेते समय आपकी मन की स्थिति संतुलित होनी चाहिए।

5.निर्णय को सही साबित करने के लिए प्रयास जरूर करना,पर अतिप्रयास मत करना।

हमने लिए हुए निर्णय को सही साबित करने के लिए हमे उसपर आसक्त नहीं होना चाहिए।हम निर्णय ले सकते है और उसको सही साबित करने के लिए प्रयास भी कर सकते है,पर उस निर्णय को सही साबित करने के लिए महत्प्रयास(अतिप्रयास) करना बहुत बडी मुर्खता है।क्योंकि भौतिक जगत मे हम कितने भी बलवान या आर्थिक दृष्टि से शक्तिशाली क्यो ना हो पर भगवान के आगे हमारी कुछ नहीं चलती।

6.भगवान पर विश्वास करना।

महाभारत के युद्ध मे अर्जुन युद्ध करने के लिए मना कर रहे थे।अर्जुन मोह मे फंसकर सही निर्णय नहीं ले पा रहे थे|जब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें भगवद्गीता का ज्ञान दिया तब अर्जुन अपने कर्तव्य पथ पर दृढ हो गए और युद्ध करने के लिए तैयार हो गए।बिना सुख-दुःख,जय-पराजय का विचार किए अर्जुन अपने युद्ध करने के कर्तव्य का पालन करने लगे।

भगवद्गीता बताने के पहले के अर्जुन और भगवद्गीता बताने के बाद के अर्जुन मे जमीन आसमान का अंतर था।अर्जुन मे इतना बडा बदलाव भगवद्गीता की वजह से आया।स्वयं भगवान ने उन्हें वो ज्ञान दिया इसलिए इतना बडा बदलाव आया।

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से हम सबके लिए गीता का उपदेश दिया है,तो हमे हमारे जीवन मे चरित्र संपन्न व्यक्ति बनने के लिए गीता के उपदेश को स्वीकार करना चाहिए और भगवान पर विश्वास रखना चाहिए,तो ही हम जीवन मे सही निर्णय ले सकते है।

7.(निर्णय कैसे लेना चाहिए?)सही निर्णय लेणे के लिये स्वयं पर विश्वास करना –

निर्णय कैसे लेना चाहिए? अगर हमे सही समय पर सही निर्णय लेना है,तो हमे स्वयं पर विश्वास रखना चाहिए।ज्यादा तर लोग जल्दी मे निर्णय लेते है,उनका स्वयं पर विश्वास नहीं होता।फिर भी वे निर्णय ले बैठते है और फिर स्वयं को कोसते है।इसलिए अगर हम कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे है तो हमे स्वयं पर विश्वास रखना बहुत जरूरी है।

हमारी निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करने के लिए हमे हमारी बुद्धि मे ज्ञान को ग्रहण करना होगा,जिससे हमारी बुद्धि मे स्वयं के लिए एक दृढ विश्वास आएगा।निर्णय लेने मे सुधार करने के लिए हमे एकमात्र ज्ञान की ही आवश्यकता है।साथ हे निर्णय लेणे की प्रक्रिया मे हमारी इंद्रिय भी बहुत मायने रखती है.हमारे इंद्रिय संतुलित होंगे तो हमारे निर्णय भी अच्छे होंगे.

आज मैंने आपको यह बताने का प्रयास किया कि हम जीवन में सही निर्णय कैसे ले सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर करें और कमेंट करें कि आपको यह जानकारी कैसी लगी।

जय श्रीकृष्ण

Leave a Reply