कामिका एकादशी व्रत 2021


कामिका एकादशी व्रत

(कामिका एकादशी व्रत कब है?)वर्ष 2022 मे कामिका एकादशी की शुभ तिथी 22 जुलाई दिन गुरुवार को है|

कामिका एकादशी का महत्व –

इस एकादशी व्रत के करने से प्राणी को ब्रह्महत्या और भ्रूणहत्या जैसे पापों से छुटकारा मिलता है। समस्त दुखों का नाश होता है। पुत्र की प्राप्ति होती है एवं उसकी अन्य मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कामिका एकादशी व्रत के करने से महापुण्य फल प्राप्त होता है। व्रती को बैकुंठ में स्थान मिलता है, उसे यमलोक की यातनाएं नहीं सहनी पड़तीं|(कामिका एकादशी का महत्व)

केदारनाथ और कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय दान करने का जो फल मिलता है,वो सब इस व्रत को करने से मिल जाता है।एस व्रत को करणे से हमे वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है|

कामिका एकादशी की पूजन विधि –

यह व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। जानते है कामिका एकादशी व्रत की पूजा विधी-

१.इस दिन प्रातः स्नानादि करके नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पूर्व की ओर मुख करके श्रद्धा-भक्ति से बैठकर शंख चक्र गदाधारी भगवान् विष्णु को पंचामृत या घृत, दूध, दही, गंगाजल से स्नान कराएं। प्रतिमा को आसन पर रखकर चंदन तिलक लगाएं।

२.फिर विधि-विधानानुसार गंध, पुष्प, दीप, नैवेद्य से षोडशोपचार विधि से भगवान् विष्णु का पूजन कर रोली, कपूर, दीपक से आरती उतारें। भोग में पंचमेवा या मिष्ठान रखें। भक्तों में प्रसाद बांटें।

३.कामिका एकादशी के दिन पांच ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें।

४.पूरा दिन सात्विक ढंग से भगवान् के चिंतन में बिताएं। इस दिन फलाहार करके उपवास करे।

५.रात भजन-कीर्तन करते हुए गुजारें। दूसरे दिन कामिका एकादशी व्रत का पारण करें।

६.इस दिन क्रोध, झगड़ा, चोरी, हिंसा से परहेज करें।

७.इस दिन हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन करणा चाहिए|

कामिका एकादशी से मिलने वाला फल –

कामिका एकादशी व्रत कथा सुनने मात्र से वाजपेई यज्ञ का फल मिलता है। कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पुजा करनी चाहिए। जो फल काशी,पुष्कर जैसे पवित्र स्थानों मे स्नान करने से मिलता है वह इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पुजने से मिलता है। काशी और कुरूक्षेत्र मे चंद्र ग्रहण के समय स्नान करने जो फल मिलता है वह फल इस दिन भगवान विष्णु की पुजा करने से मिलता है। श्रावण मास में भगवान विष्णु का पुजन करने से गंधर्व और देवता सब पुजे जाते है।

जो व्यक्ति पापफलों से भयभीत होते है उनको इस एकादशी का यह व्रत करना चाहिए। यह व्रत पापी व्यक्ति का उद्धार करने का भी सामर्थ्य रखता है। इस भौतिक संसार में डूबे मनुष्यों के लिए यह एकादशी बहुत महत्व रखती है। कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की तुलसीपत्र से पुजा करने से व्रती के सारे पाप धूल जाते है। भगवान को स्वर्ण के आभूषणों से ज्यादा तुलसीपत्र प्रिय लगता है। तुलसीपत्र से भगवान की पुजा करने से व्रती का कल्याण हो जाता है क्योंकि यह तुलसीदल भगवान को अति प्रिय है। तुलसीदल से कि हुई पुजा को भगवान शीघ्र स्वीकार करते है।

किसी भी एकादशी के रात्री को जागरण करने से बहुत शुभ फल प्राप्त होता है। एकादशी के रात्री को जागरण करने से भी व्रती को शुभ फल प्राप्त होता है। एकादशी के रात्री को भगवान के मंदिर में दीप जलाने से हमारे पितरों का उद्धार होता है। इस एकादशी का यह व्रत इतना प्रभावी है की यह ब्रम्हहत्या तथा भ्रूणहत्या जैसे पापों को भी नष्ट करता है।

इस एकादशी व्रत की पौराणिक कथा –

इस एकादशी की कथा का उल्लेख ब्रम्हवैवर्तपुराण में आया है। धर्मराज युधिष्ठिर ने एक बार सुदिप मुनी से पुछा की ‘सभी मनोकामनाए पूर्ण करने वाली कामिका एकादशी के बारे में बताए’। तब सुदिप मुनि ने कहा की इस एकादशी का व्रत करने से सभी प्रकार के पुण्य का और दान का फल मिलता है। कामिका एकादशी के दिन श्रद्धा से भगवान विष्णु की पुजा करने से सुख संपत्ती तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सुदिप मुनि ने आगे बताया की कामिका एकादशी का व्रत करने से व्रती की मनोकामनाए पूर्ण होती है और सद्गती प्राप्त होती है। जो व्यक्ति कामिका एकादशी का व्रत विधी विधान के साथ करता है उसके दुख दूर हो जाते है और इस लोक में उसे सुख प्राप्त होता है।

पापों को दूर करने वाली और व्रती को सुख देने वाली इस एकादशी का व्रत सभी को अवश्य करना चाहिए।

This Post Has 3 Comments

  1. Akash pol

    Nice information thanks

  2. जयदीप सोनी

    बहुत बढ़िया पोस्ट है ।
    जय हो
    जय श्री कृष्ण ।
    🙏🙏🙏🙏🚩🚩🚩

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